छॉलीवुड अभिनेता डॉ.विजय कुमार शाही से एक मुलाकात

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शिक्षा के क्षेत्र से सिनेमा में आए डॉ.विजय कुमार शाही अब छॉलीवुड में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| प्रस्तुत है उनका साक्षात्कार
रिपोर्टर- सबसे पहले तो शाही जी छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेता बनने के लिए आपको असीम बधाई एवं शुभकामनाएँ|
डॉ. शाही— जी, धन्यवाद |

रिपोर्टर- अभी आप की कौन-कौन सी फिल्में आने वाली है?
डॉ.शाही— अभी-अभी मेरी फिल्म असली कलाकार 19 दिसंबर 2019 को रिलीज हुई| उसके बाद जॉनी आई लव यू यार, डेढ़ होशियार, प्रेम शक्ति और संदेशा मोर कलम के 2020 में आएगी|

रिपोर्टर- अच्छा, आपको फिल्म इंडस्ट्री में लाने का श्रेय किसे जाता है?
डॉ.शाही- फिल्म इंडस्ट्री में मुझे लाने का श्रेय भुनेश साहू जी को जाता है, जो सुंदर मोर छत्तीसगढ़ के हीरो हैं| हम दोनों एक ही विद्यालय में कार्यरत हैं| उन्होंने फिल्म 'सुंदर मोर छत्तीसगढ़' की कहानी मुझे सुनाई थी और कहा था कि नेता की भूमिका है, कीजिए| मैंने उसे निभाई, इसके बाद फिर मुझे और भी कई फिल्में मिलती चली गई| इसके बाद छत्तीसगढ़ के निर्माता निर्देशकों व अन्य कलाकारों के संपर्क में आया| सभी ने मुझे मान सम्मान दिया|

रिपोर्टर- इसके अलावा भी किसी ने आपकी कोई मदद की फिल्मी दुनिया में?
डॉ.शाही- जी, फिल्मी दुनिया में सबसे अधिक मदद की श्री राजू पांडे, श्री रज्जू चंद्रवंशी और अन्नू शर्मा जी ने, जो छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री के नामचीन चरित्र अभिनेता है| उन्होंने मुझे 'जानू आई लव यू यार' व 'डेढ़ होशियार' आदि फिल्में दिलवाई|

रिपोर्टर- आपका पूरा परिवार ही कलाकार है|
डॉ.शाही- जी, मेरा पूरा परिवार ही कलाकार है| मेरी श्रीमती जी सुभद्रा शाही, पुत्र संजय कुमार शाही और मैं तीनों ही फिल्मों में काम करते हैं| जानू आई लव यू यार फिल्म में हम तीनों ने काम किया है| एक महत्वपूर्ण गीत में सुजय ने भी अभिनय किया है| प्रकाश अवस्थी जी की फिल्म डेढ़ होशियार में हम पति-पत्नी ने काम किया है और भी कई फिल्में मिल सकती है ऐसी संभावनाएं बन रही है| सुभद्रा जी शिक्षिका होने के साथ ही हिन्दी व अंग्रेजी में लेखन कार्य करती हैं| सुजय नाटकों में भाग लेता रहता है|

रिपोर्टर- साहित्य के क्षेत्र में भी आपका योगदान है| आपकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हैं |
डॉ.शाही- जी, साहित्य के क्षेत्र में मै जब पांचवीं में पढ़ता था| तब आया| उसी समय तुकबंदी शुरु कर दी थी| मेरी पहली कविता दसवीं कक्षा में छपी| इसके बाद जब मैं बीए में था उस समय मेरी पहली किताब 'काव्याग्नि' प्रकाशित हो गई| इसके बाद अभी तक मेरी तेईस किताबें प्रकाशित हो चुकी है| उनमें से कई पुस्तकें संबलपुर, बरगढ़ और नई दिल्ली से प्रकाशित है| जब मैं कक्षा चौथी में पढ़ता था तब स्कूल के वार्षिकोत्सव व सरस्वती पूजा में स्कूल के नाटकों में भाग लेता था, वहीं से अभिनय के बीज पड़े|

रिपोर्टर- आप छॉलीवुड के किन निर्देशकों को अधिक पसंद करते हैं ?
डॉ.शाही- जी हाँ, एक से एक बढ़कर निर्देशक हैं, सभी मेरे सम्माननीय हैं| फिर भी उनमें मैं सतीश जैन जी, मोहन सुंदरानी जी, संतोष जैन, उत्तम तिवारी जी, प्रकाश अवस्थी जी, पुष्पेंद्र सिंह जी, धर्मेंद्र चौबे जी, बीरबल पाणिग्राही जी, राहुल सुखदेवे जी, नीरज श्रीवास्तव जी, दानेश निषाद जी, सुनील सागर जी, नरेश बोगा जी, हरीश जी को विशेष मानता हूं|

रिपोर्टर- और निर्माताओं में आपका विशेष ?
डॉ.शाही- छॉलीवुड के भीष्म पितामह मोहन सुंदरानी जी, रंगरसिया निर्माता अशोक तिवारी जी, बाहुबली निर्माता जेठू साहू जी, प्रकाश अवस्थी जी, संतोष जैन, अखिलेश मिश्रा जी, नरेश बोगा, मोहित साहू, राहुल सुखदेवे जी, अजय अग्रवाल जी हैं |

रिपोर्टर- आप छत्तीसगढ़ फिल्मों के विषय में क्या सोचते हैं?
डॉ.शाही- अब तो छत्तीसगढ़ की फिल्में भी बॉलीवुड की तरह तेजी से आगे बढ़ने लगी है| यहां भी अच्छी फिल्में बनने लगी है| नए कलाकारों को मौका मिलने लगा है| भविष्य उज्ज्वल है|

रिपोर्टर- छत्तीसगढ़ी फिल्म के प्रचार के बारे में क्या सोचते हैं?
डॉ.शाही- छत्तीसगढ़ी फिल्म के प्रचार के निमित्त स्मार्ट सिनेमा, छॉलीवुड स्टारडम तथा रायपुर दुनिया का विशेष योगदान है|

रिपोर्टर- यहाँ के थिएटर के विषय में क्या सोचते हैं?
डॉ. शाही- यहाँ थिएटर की कमी है| इतना बड़ा राज्य है, कम से कम 200 थिएटर होनी चाहिए| जिसमें अगर फिल्में लगे तो निर्माताओं को अच्छी कमाई हो| लेकिन कम है| सरकार को और बॉलीवुड से जुड़े हुए नामचीन और समृद्ध लोगों को इस विषय में सोचना चाहिए|

रिपोर्टर- आप छत्तीसगढ़ी फिल्म के अलावा किस भाषा की फिल्मों को करना चाहेंगे?
डॉ.शाही- मैं हिन्दी, भोजपुरी तथा ओड़िआ भाषा की फिल्नें करना चाहूँगा क्योंकि इन भाषाओं में मेरी अच्छी पकड़ है|

रिपोर्टर- शाही जी अभिनय के अलावा और क्या कर रहे हैं ?
डॉ.शाही- मैं मूलत: एक शिक्षक हूँ| साहित्यकार के रूप में कविता, कहानी, समीक्षा तथा उपन्यास लेखन कार्य चल रहा है|

रिपोर्टर- शाही जी आप नए कलाकारों को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
डॉ.शाही – नए कलाकारों को मैं यही संदेश देना चाहूंगा कि परिश्रम के साथ अभिनय कला को समझें और किसी भी भूमिका को छोटा-बड़ा ना माने| जो भी भूमिका मिले उसमें अपना पूरा 100% दें | परिश्रम करते चलें धीरे-धीरे उन्हें काम मिलता ही जाएगा और एक समय ऐसा आएगा कि इंडस्ट्री में स्थापित हो जाएंगे|

Raipur Dunia

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